18 मौत के बाद भी मुस्कान? ब्रेक वाली बात
सवाल सीधा था: 18 महिलाओं की मौत पर क्या जवाब है, और जांच किस चरण में है? बैठक या प्रेस बातचीत में जब यह बात उठी, तो माहौल एकदम सख्त हो गया। पत्रकारों ने लगातार सवाल पूछे, और तब मंत्री जी ने बीच में ही बात रोक दी। वे खड़े हुए, मुस्कुराए, और चले गए, जैसे कह रहे हों कि अभी इस पर बोलने का समय नहीं। यही छोटी-सी अदा पूरे दृश्य का सबसे बड़ा संकेत बन गई। क्योंकि जब लोग किसी दुख और जिम्मेदारी वाले मामले पर सीधा जवाब सुनना चाहते हैं, तब ब्रेक की लाइन और भी भारी लगती है। जयपुर में ऐसे मौकों पर लोग अक्सर कहते हैं—बात टालना आसान है, पर सवाल का बोझ वहीं का वहीं रहता है। इस घटना ने वही एहसास छोड़ा: जवाब से ज्यादा, टालने का तरीका चर्चा में रह गया।
