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बागर: बाजरे के पूलों का सही ढेर
मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

बागर: बाजरे के पूलों का सही ढेर

बागर वह मारवाड़ी शब्द है जो गाँव की मेहनत को सीधे याद दिलाता है। इसका मतलब है: बाजरे के पूलों को ठीक तरह से ढेर करके रखना, ताकि बाद में काम आए। म्हारे यहाँ बागर देखकर लगता है, घणी सोच के साथ सूखा भी संभाल लिया।

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कोलकाता से जयपुर तक नई ट्रेन, सफर हुआ और सीधा

कोलकाता से जयपुर तक नई ट्रेन, सफर हुआ और सीधा

संतरागाछी से खातीपुरा तक नई ट्रेन चल पड़ी है, और रेल मानचित्र पर एक और सीधी रेखा जुड़ गई। झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के यात्रियों के लिए यह काफ़ी काम की चीज़ है। अब मार्ग और ठहराव देखकर ही समझ आता है, असली फ़ायदा कहाँ से निकलेगा।

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विस्तारित जयपुर में पानी के नए जोड़

विस्तारित जयपुर में पानी के नए जोड़

पच्चीस दिन से गर्मी और पानी की टेंशन चल रही है, और अब विस्तारित पश्चिम जयपुर में नई लाइन का संकेत आया है। पीएचईडी 3,000 से ज़्यादा बिसलपुर 2.0 जोड़ देने जा रहा है। पर ऊँची इमारतों का क्या होगा, वह सवाल अभी हवा में लटका है।

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जयपुर में बिजली का चक्कर: 100 से ज्यादा इलाकों में आज

जयपुर में बिजली का चक्कर: 100 से ज्यादा इलाकों में आज

पंखा चल रहा था, और अचानक जयपुर का आधा मिजाज भी धीमा हो गया। आज 100 से ज्यादा इलाकों में रखरखाव के चलते बिजली बंद रहने वाली है, और शिफ्ट भी एक ही नहीं। सबसे बड़ा सवाल वही है—आपके घर की लाइन कब रुकेगी?

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केडिया पवित्र का एक साल: रसोई की सफाई पर जोर

केडिया पवित्र का एक साल: रसोई की सफाई पर जोर

आटे की मुट्ठी, हल्दी की चुटकी और सरसों के तेल की बूंद — रसोई का भरोसा इन्हीं से बनता है। Kedia Pavitra ने एक साल में राजस्थान के हर जिले तक प्रीमियम रसोई सामग्री पहुँचाने का दावा किया है। पर असली बात यह है: घर की थाली का भरोसा कैसे बचा?

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प्राइवेट स्कूलों की फ़ीस पर अभिभावकों का सवाल

प्राइवेट स्कूलों की फ़ीस पर अभिभावकों का सवाल

देखो, जयपुर में प्राइवेट स्कूलों की फ़ीस को लेकर एक पुराना सवाल फिर सामने आ गया है। अभिभावक संगठन का कहना है कि कई स्कूल राजस्थान फ़ीस अधिनियम 2016 के हिसाब से पीटीए और एसएलएफ़सी की जानकारी अभिभावकों को नहीं दे रहे। इसी कमी से फ़ीस निर्धारण पर शक बढ़ रहा है, और सत्यापन का मुद्दा अब सीधे सामने है।

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जवाहर कला केंद्र में लाइफ के रंग

जवाहर कला केंद्र में लाइफ के रंग

जवाहर कला केंद्र की सुरेख कला दीर्घा में एक युवा चित्रकार ने ऐसे कैनवस दिखाए, जैसे रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातें रंग बनकर बोल उठी हों। दीवार पर लगी हर पेंटिंग में जयपुर की धड़कन थी, पर सबसे ज़्यादा एक दृश्य ने रुकने पर मजबूर किया — वह कौन सा था?

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जोहरी बाजार: आँख से खरीद, ऐप से नहीं
जयपुर बोलेJaipur Bole

जोहरी बाजार: आँख से खरीद, ऐप से नहीं

जोहरी बाजार की दुकानों में अब भी चमक स्क्रीन पर नहीं, शीशे के पीछे मिलती है। पत्थर को उँगली से नहीं, नज़र से तोलते लोग यहाँ रुक जाते हैं। घणी सच्ची बात ये है—एक दुकान में आधा घंटा देखा, और वही एक नीलम का रंग पसंद आ गया।

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रावत की लाइन में सब दार्शनिक
कॉमिक कविComic Kavi

रावत की लाइन में सब दार्शनिक

रावत की कचौरी के लिए लाइन लगते ही जयपुर का आदमी दार्शनिक बन जाता है। किसी को 5 मिनट लगते ही 50 साल का धैर्य याद आता है, और किसी को खाली प्लेट देखकर ज़िंदगी की रफ़्तार समझ आती है। पर एक आदमी का 17 मिनट वाला हिसाब सबको छुपा कर हँसा गया।

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ब्लू पॉटरी: जयपुर की नीली कहानी
लोक फाइल्सLok Files

ब्लू पॉटरी: जयपुर की नीली कहानी

हवा महल के रंग से अलग, जयपुर की ब्लू पॉटरी में कोबाल्ट की नीली चमक होती है। इसमें मिट्टी नहीं, क्वार्ट्ज, काँच और मुल्तानी मिट्टी का घोल बनता है। घणी खास बात? यह एक ही बार पकती है, और बिना दरार के चमकती रहती है।

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जयपुर में 3 दिन का ड्राइव, 557 ड्रंक ड्राइवर पकड़े

जयपुर में 3 दिन का ड्राइव, 557 ड्रंक ड्राइवर पकड़े

जयपुर की सड़कों पर एक ही संकेत बार-बार दिखा — रात का यातायात, और साथ में पुलिस की जाँच। 3 दिन के विशेष अभियान में 557 नशे में वाहन चलाने वाले पकड़े गए, और 24 घंटे में ही 271। अब सवाल यह है: इस अभियान का अगला कदम क्या होगा?

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जयपुर में नकली नोट पकड़े गए, गिनती बड़ी निकली

जयपुर में नकली नोट पकड़े गए, गिनती बड़ी निकली

जयपुर की गलियों में एक और नोट ने सबको चौकन्ना कर दिया। पुलिस ने 3.45 लाख रुपये के नकली 500 रुपये के नोट पकड़े, और बात यहीं तक नहीं थी — इन्हें पंचायत चुनाव और त्योहारी भीड़ में चलाने की तैयारी थी। अब असली सवाल वही है: इतनी बड़ी गिनती आई कहाँ से?

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जयपुर से टाटानगर-सान्तरागाछी तक नई रेल से राह और आसान

जयपुर से टाटानगर-सान्तरागाछी तक नई रेल से राह और आसान

खातीपुरा स्टेशन पर आज एक नई रेल लाइन का एहसास हुआ — जयपुर से टाटानगर-सान्तरागाछी एक्सप्रेस की शुरुआत। एक ही गाड़ी से राजस्थान और पूरब के शहरों के बीच सफर थोड़ा और सीधा हो गया। सबसे बड़ी बात क्या है, वह इस मार्ग की पहली दैनिक ज़रूरत बनेगी या नहीं?

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चोखी ढाणी की थाली, धीरे-धीरे जादू
पिंक सिटी डायरीज़Pink City Diaries

चोखी ढाणी की थाली, धीरे-धीरे जादू

चोखी ढाणी की बैठकर खाने वाली थाली में पहला निवाला ही बता देता है कि यह डिनर नहीं, एक रस्म है। बाजरे का रोटला, गट्टे और चूरमे की घी वाली खुशबू के बीच मेज पर वक्त धीमा हो जाता है। सबसे खास? वह प्लेट जो खत्म होते ही परिवार ने एक रोटी और मांगी।

7h
बाछी: गाय का छोटा प्यार
मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

बाछी: गाय का छोटा प्यार

बाछी, यानी छोटी गाय — गाँव की सबसे प्यारी पहचान। इस शब्द में कोमलता भी है और अपनापन भी। बोलो, “वह बाछी अब चरने निकल गई,” और दृश्य तुरंत गाँव का लगने लगता है। घणी प्यारी बात है, ना?

8h
लॉ के छात्रों की 48-टीम वाली भिड़ंत जयपुर में

लॉ के छात्रों की 48-टीम वाली भिड़ंत जयपुर में

जयपुर के विधि परिसर में 48 प्रतिभागी और 16 टीमें एक ही मैदान में उतर आईं। 12वीं Manipal Ranka International Moot Court Competition का दृश्य कुछ अलग ही था — फ़ाइलें, दलीलें और तेज़ दिमाग का मेल। सबसे रोचक बात? फ़ाइनल तक का रास्ता कौन-सी टीम सबसे शांत रहकर पार करती है, वही असली मोड़ है।

10h
जयपुर की नीली मिट्टी में ठंडक का जादू
आज की जयपुरAaj Ki Jaipur

जयपुर की नीली मिट्टी में ठंडक का जादू

जयपुर की नीली मिट्टी की कार्यशाला में मिट्टी, क्वार्ट्ज और चमकदार परत मिलकर ऐसा रंग बनाते हैं जो आँखों को ठंडक दे। हाथ से बने बेल-बूटे, चमकदार निशान और भट्टी की आँच के बीच सब्र की परीक्षा होती है। एक गलती, और पूरी टोकरी खराब।

12h
पचरंगा अचार की पार्लियामेंटरी लड़ाई
कॉमिक कविComic Kavi

पचरंगा अचार की पार्लियामेंटरी लड़ाई

पचरंगा अचार का डिब्बा खुलते ही घर में वोट-गिनती शुरू। छोटा सा आम का टुकड़ा, पर सबकी नज़र उसी पर; एक कहे “मेरी प्लेट में,” दूसरा “मैंने ही रखा था।” चाय के समय यह छोटी सी साज़िश ही जयपुर वाली असली पारिवारिक कूटनीति है।

13h
अठवाड़ो: थाली का छोटा हीरो
मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

अठवाड़ो: थाली का छोटा हीरो

थाली खाली होते-होते जो कोने में चिपक जाए, वही है अठवाड़ो — बर्तन में बचा हुआ खाना। मारवाड़ी में ये शब्द काम का भी है और प्यारा भी। प्रयोग: "रोटी का अठवाड़ो मत छोड़ो, प्यास बाद में आएगी।"

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पंचायत चुनाव के लिए भाजपा का नया जोर

पंचायत चुनाव के लिए भाजपा का नया जोर

पंचायत के मैदान में अब शहरी निकाय वाली जीत का फॉर्मूला फिर से याद दिलाया जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं को सीधा संदेश मिला है — गांव की सियासत में भी वही जोश, वही टीमवर्क, और वही बूथ-स्तर की मेहनत चाहिए। अब सबकी नजर उसी एक तैयारी पर है जो अगले कदम का मूड सेट करेगी।

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