18 मौत पर सवाल, मुस्कान और "ब्रेक के बाद"
18 लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल और तेज हो गए। प्रेस बातचीत में जब पत्रकारों ने जांच, जवाबदेही और अगले कदम पर बार-बार पूछा, तो मंत्री का अंदाज़ एकदम अलग दिखा। वे बातचीत बीच में छोड़कर उठ गए और मुस्कुराते हुए कह दिया कि बाकी बात ब्रेक के बाद होगी। यह छोटा-सा दृश्य इसलिए चुभ गया क्योंकि सवाल छोटे नहीं थे। लोग जानना चाहते थे कि इतनी बड़ी घटना के बाद निगरानी कहाँ थी, और अब क्या अलग होगा। मंत्रिस्तरीय स्तर पर ऐसे पल अक्सर बस एक पंक्ति में निकल जाते हैं, पर जनता उन्हीं पंक्तियों से माहौल भाँप लेती है। "ब्रेक के बाद" वाली बात ने भी वही किया। असल असर यही है: जब संकट पर स्पष्टता चाहिए, तब हर अधूरी बात और भी भारी लगती है।
