31 जुलाई तक चुनाव नहीं — अब गांव और नगर का इंतजार लंबा
पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की तारीख 31 जुलाई तक तय नहीं हो पाई, और इससे राजस्थान की स्थानीय राजनीति का सबसे सीधा सवाल फिर सामने आ गया — मतदान कब होगा? राज्य निर्वाचन आयोग के इस फैसले का मतलब यह है कि गांव की पंचायत से लेकर शहर की स्थानीय संस्था तक, लोगों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। म्हारे यहां ऐसे मौके पर चाय की दुकान से लेकर वार्ड के कोने तक एक ही बात घूमती है: काम का हिसाब कब होगा? अब तैयारी रुकी नहीं है, बस समय-सारिणी और आगे खिसक गई है। चुनाव का कैलेंडर जब आगे बढ़ता है, तो स्थानीय मुद्दे भी और साफ दिखते हैं — सफाई, पानी, सड़क और रोज़ की सुनवाई। घणी सच्ची बात यही है कि छोटी सरकार का असर सीधे गली तक आता है।
