42,000 सहकारी समितियाँ: राजस्थान का ग्रामीण धक्का
जयपुर में सहकारी क्षेत्र पर जो बात उठी, उसका हिसाब सीधे गाँव की ज़िंदगी से जुड़ा था। समारोह में बताया गया कि छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं, और राजस्थान में 42,000 से अधिक सहकारी समितियाँ इसी बदलाव की नींव बन रही हैं। इस नेटवर्क से किसानों को बीज, भंडारण और बाज़ार से जुड़ाव मिलता है, जबकि महिलाओं और ग्रामीण समूहों के लिए भी नए अवसर बनते हैं। कार्यक्रम का एक और पहलू जैविक खेती था। संदेश साफ था — मिट्टी को संभालकर ही लंबी दौड़ जीती जा सकती है। साथ ही नए गोदाम और e-PACS की शुरुआत की गई, ताकि सहकारी क्षेत्र को थोड़ा और आधुनिक बनाया जा सके। एक बात बार-बार महसूस हुई: व्यवस्था बदलेगी तो गाँव की अर्थव्यवस्था भी सीधी खड़ी होगी। जयपुर की इस सभा ने सिर्फ़ भाषण नहीं दिया, एक संख्याओं वाला खाका भी दिखाया।
