75 साल पर Assembly की debate छोटी क्यों हो गई?
राजस्थान विधान सभा के 75 साल पूरे होते ही एक पुराना सवाल फिर सामने आ गया: बोलने के लिए जगह कितनी बची है? शुरुआती दौर में 305 बैठकों तक पहुँचने वाली सदन की रफ्तार अब 84 पर आकर थमी-सी लगती है। अमृत महोत्सव की दूसरी बैठक में पुराने और मौजूदा विधायक एक साथ बैठे, और बात सिर्फ यादों की नहीं, काम की गुणवत्ता की भी हुई। पुस्तकालय का अधिक उपयोग, पहले से तैयारी, और सदन में मर्यादा — इन सब पर ज़ोर दिया गया। कोचिंग, किरायेदारी, गिग कामगार, प्राथमिक शिक्षा और पंचायत जैसे कानून याद दिलाते हैं कि Assembly ने सिर्फ फैसले नहीं, Rajasthan की रोज़मर्रा ज़िंदगी का नक्शा भी बदला है। पर जब बैठकें कम हो जाएँ, तो प्रश्न और तेज़ हो जाता है: debate की वह पुरानी गर्माहट अब कहाँ गई?
