8000 स्क्वेयर फीट डुप्लेक्स में क्लैरिटी का कमाल
8000 स्क्वेयर फीट का डुप्लेक्स सुनते ही दिमाग में बस बड़ा-पन आता है, पर यहाँ डिज़ाइन ने उसको सीधा और साफ बना दिया। एक तरफ एक्सपैंसिव लेआउट है, दूसरी तरफ ऐसे कॉर्नर्स हैं जो घर को ठंडा नहीं, अपना-सा बनाते हैं। यह ही आर्ट ऑफ क्लैरिटी है — बिना एक्स्ट्रा शोर के स्पेस को समझना। इस टाइप के होम में सबसे बड़ी चैलेंज होती है स्केल और सुकून का बैलेंस। यहाँ ओपन प्लानिंग, नेचुरल फ्लो और थॉटफुल ज़ोनिंग से वह बैलेंस पकड़ा गया है। मतलब, रूम बस दिखते नहीं, काम भी करते हैं। एक डिज़ाइनर की साइड से ऐसी सोच सुनने को मिलती है: घर को इम्प्रेस करना नहीं, जीने लायक बनाना होता है। मुंबई जैसे शहर में इतनी साफ स्पेशियल लैंग्वेज मिलना खुद में बात है। ग्रैंड भी, और सोलफुल भी — बस यही इस डुप्लेक्स की सबसे बड़ी जीत लगती है.
