97 साल की यादों में सार्वजनिक जीवन का सफर
सी-स्कीम के घर पर हुई इस मुलाकात में 97 साल की पूर्व अध्यक्ष ने सार्वजनिक जीवन के लंबे सफर की बातें साझा कीं। बैठक का माहौल औपचारिक कम, यादों वाला ज़्यादा था — विधानसभा के पुराने किस्से, काम करने के तरीके और राजस्थान की सियासत के बदलते रंग सब एक-एक करके सामने आए। ऐसी मुलाकात सिर्फ एक भेंट नहीं होती, बल्कि राज्य की सार्वजनिक स्मृति का छोटा-सा रिकॉर्ड बन जाती है। पुराने नेताओं की यादें अक्सर आज की तेज़ राजनीति को थोड़ा ठहराव देती हैं। वहाँ एक टिप्पणी ऐसी भी आई जो सबको थोड़ी देर रुकने पर मजबूर कर गई — सार्वजनिक जीवन में टिकना सिर्फ पद नहीं, आदत और सब्र का काम होता है। घणी सच्ची बात है, जयपुर की ऐसी यादें ही शहर की सियासत को इंसानी रंग देती हैं।
