आगळ: दरवाज़े का छोटा सा हीरो
दरवाज़े का नाम सुनते ही लोग कब्ज़ा और कुंडी सोचते हैं, पर राजस्थान के घरों में एक और छोटा हीरो होता है: आगळ। यह लकड़ी की डंडी होती है जो दरवाज़े की पत्तियों को थामकर रखती है, ताकि हवा, धक्का या ज़्यादा खुलने से दरवाज़ा हिल न जाए। घर के बड़े अक्सर बोल देते थे, "आगळ चढ़ा दे।" इसका मतलब था काम ठीक कर दो। मारवाड़ी में ऐसी सीधी, काम की बात ही तो प्यारी लगती है। आज भले धातु का ताला मिल जाए, पर आगळ वाली समझ याद दिलाती है कि पुराने घर सिर्फ दीवार से नहीं, जुगाड़ से भी बनते थे.
