आंबली: खट्टी बात का स्वाद
आंबली, यानी इमली, मारवाड़ी में घणी प्यारी बात है। गर्मियों में कच्ची आंबली का खट्टा स्वाद, और सर्दियों में चटनी का तीखा-झाग, दोनों ही घर की रसोई से जुड़े रहते हैं। जयपुर और आसपास के इलाकों में लोग इस शब्द को सीधा बोल देते हैं, बिना कोई छुपाव के। प्रयोग भी सीधा है: “म्हारी चाट में थोड़ी आंबली डाल दे।” बस, बात पक्की। इस एक शब्द में खट्टापन भी है, याद भी, और घर का स्वाद भी। मारवाड़ी की मीठी आदत यही है — छोटी सी बात, पर दिल तक सीधी। आंबली सुनते ही ज़बान पर जो लार आती है, वही इस शब्द की असली पहचान है।
