आंक: मारवाड़ी का सीधा-सा हिसाब
आंक मारवाड़ी का वह शब्द है जो सीधे दिमाग में बैठ जाता है: संख्याएँ, गिनती, हिसाब। घर की सब्ज़ी हो, स्कूल की अंक-सूची हो, या बाज़ार का उधार, आंक के बिना काम नहीं चलता। जयपुर के कई घरों में बड़े अब भी बोल देते हैं, "आंक संभाल के रख," मतलब गिनती और हिसाब साफ़ रखो। इसमें एक सादगी है — कम शब्द, सीधी बात। मारवाड़ी में इसकी खूबसूरती यही है कि एक छोटा-सा शब्द पूरी गणना का भाव ले आता है। छोटा उपयोग: "म्हारी दुकान का आंक कल रात तक मिल गया।" बस, आज का शब्द याद कर लो; आंक मतलब संख्याएँ, और हिसाब भी।
