आंखड़ल्यां: घात से पहले वाली बात
आंखड़ल्यां मारवाड़ी में आँखों को बोलते हैं, और इस शब्द में एक नरमी सी है। जयपुर की गली हो या गाँव का आँगन, नज़र का काम पहले हो जाता है, बात बाद में। इसलिए यह शब्द सिर्फ शरीर का हिस्सा नहीं, भावना भी है। कभी कोई बिना बोले ही सब समझा दे, तो मारवाड़ी में कह सकते हो: "उसकी आंखड़ल्यां सब कह गई।" यह पंक्ति खेल-खेल में भी लगती है और बिलकुल सच्ची भी। स्कूल के दोस्तों से लेकर घर की नानी तक, ऐसा शब्द बोलने से बात अपनी लगती है। म्हारे हिसाब से, मारवाड़ी का जादू यही है — छोटी सी बात, पर सीधे दिल तक। आंखड़ल्यां याद रखना, कल किसी और शब्द से मिलवाएँगे।
