आपणों: घर की सबसे अपनी बात
आपणों — यानी “हमारा” — मारवाड़ी का वह शब्द है जो सीधे दिल पर लगता है। घर की चाय, छत की छाया, या गाँव का मेला — जब चीज़ अपनी महसूस हो, तो लोग बोल देते हैं, “यह आपणों है।” इसमें सिर्फ़ मालिकाना हक़ नहीं, अपनापन भी है। जयपुर के घरों में भी आप सुनोगे: “पानी आपणों बचा के रखो।” यहाँ शब्द का स्वाद ही अलग है, क्योंकि बात सिर्फ़ अधिकार की नहीं, रिश्ते की है। छोटा-सा उदाहरण: “यह गली आपणों है, इसे साफ़ रखो।” मारवाड़ी-मुक्ति का मज़ेदार हिस्सा यही है — एक शब्द, और पूरी महफ़िल का रंग बदल जाए। सच्ची, आपणों जैसा शब्द कम ही मिलता है।
