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अबुराज नाम से घणी याद जुड़ी है

Aburaj naam se ghani yaad judi hai

माउंट आबू का नाम अबुराज करने की घोषणा ने एक सीधा सा सवाल उठा दिया: पहाड़ों के बीच बसी एक जगह की पहचान कैसे सिर्फ कागज़ पर नहीं, लोगों की ज़ुबान पर भी ज़िंदा रखी जाती है। सिरोही में 41 विकास परियोजनाओं की शुरुआत और आधार-शिला रखने के बाद जो बात सबसे अलग सुनाई दी, वह थी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सँभालने की बात। इस फैसले को लोग एक ऐसे संकेत की तरह देख रहे हैं, जिसमें सरकार पुराने औपनिवेशिक चिह्नों को हटाकर अपनी ज़मीन, अपनी भाषा और अपने इतिहास को आगे रखना चाहती है। अबुराज नाम भी इसी सोच का हिस्सा लगता है — थोड़ा अपना, थोड़ा पुराना, और घणी यादों वाला। ऐसे बदलाव कभी-कभी बस नाम नहीं होते, पूरी जगह की धड़कन बदल देते हैं।