एसीबी की पकड़ से जयपुर नगर निगम में हलचल
जयपुर नगर निगम के कार्यालय में आज रोज़मर्रा का रंग थोड़ा फीका पड़ गया। एसीबी ने रिश्वत के मामले में एक कनिष्ठ अभियंता को पकड़ा, और ऐसी कार्रवाई एक बार फिर याद दिलाती है कि फ़ाइल, काम और पैसा जब एक ही मेज़ पर आ जाते हैं, तो आम आदमी का सबसे पहला सवाल वही होता है — क्या बिना पैसे के काम रुक ही जाता है? शहर में ऐसे मामले नया चेहरा नहीं हैं। कभी नक्शा, कभी अनापत्ति प्रमाण पत्र, कभी निरीक्षण — और बीच में वह रेखा, जो कागज़ पर नहीं लिखी जाती पर लोग समझ जाते हैं। एसीबी की कार्रवाई से व्यवस्था पर नज़र तो पड़ती ही है, साथ ही यह भी दिखता है कि नगर निगम जैसे कार्यालय में छोटी पदवी पर बैठा एक व्यक्ति भी कितनी बड़ी उलझन का हिस्सा बन सकता है। घणी सच्ची बात यह है कि ऐसे मामले का असर सिर्फ एक कार्यालय तक सीमित नहीं रहता, पूरा भरोसे का माहौल हिल जाता है।
