अडाणै: गिरवी नहीं, याद की रखी
अडाणै सुनते ही सीधा बाज़ार, क़र्ज़ और घर की छोटी मुश्किल याद आती है। मारवाड़ी में इसका मतलब होता है: कोई चीज़ जो गिरवी रख दी गई हो। जयपुर, शेखावाटी या गाँव के मेले-बाज़ार में ऐसी बात पुरानी नहीं है। कभी गहने, कभी ज़मीन का काग़ज़, कभी घर की कोई ज़रूरी चीज़ — सब अडाणै जा सकते हैं। इस शब्द की ताकत इसलिए है क्योंकि यह सिर्फ चीज़ नहीं, हालत भी बताता है। “म्हारी चाँदी अडाणै पड़ी है” — मतलब पैसा अटका हुआ है, और अब उसे छुड़ाने की बात चल रही है। आज का मारवाड़ी शब्द यही है: अडाणै। छोटा लफ्ज़, पर उसमें घर की सारी मजबूरी और उम्मीद दोनों घणी साफ़ दिखती हैं।
