अजमेर में 12 घंटे का धरना, फिर बनी बात
अजमेर में जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर मंगलवार को जो दृश्य बना, वह सामान्य दिन जैसा बिल्कुल नहीं था। मृत डकैत जगन गुर्जर के परिजन वहां 12 घंटे तक बैठे रहे और अपनी मांगें सामने रखीं। उनकी बात थी कि परिवार की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए, अजमेर उच्च सुरक्षा जेल में बंद एक सदस्य को भरतपुर या धौलपुर भेजा जाए, और मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। शाम तक अधिकारियों से मिले आश्वासन के बाद धरना समाप्त हो गया। ऐसे मौकों पर अजमेर की सड़कों और अस्पताल के बाहर का माहौल एक ही बात कहता है—लोग सीधे तरीके से सुनवाई चाहते हैं। मुर्दाघर के बाहर का वह 12 घंटे का इंतजार भी इसी बात का संकेत था कि परिवार अपनी बात को सिर्फ कागज पर नहीं, सामने सुनवाना चाहता था।
