अल्बर्ट हॉल की शाम, लॉन और रोशनी का सुकून
अल्बर्ट हॉल के आसपास शाम पड़ते ही पिंक सिटी का मिजाज धीमा और प्यारा हो जाता है। लॉन पर घूमते परिवार, गोलगप्पे के पैकेट, और बच्चों की हल्की-सी दौड़—सब मिलकर एक सीधा-सा जयपुर बना देते हैं। संग्रहालय की रोशनी जब धीरे-धीरे जलती है, तो सफेद पत्थर पर एक नरम-सा सोना उतर आता है। यहीं एक बेंच पर बैठी दादी ने कहा, "आज तो घणी भीड़ थी," और वह भीड़ किसी शोर की नहीं, सुकून की थी। कोई जोड़ा फोटो ले रहा था, कोई छत के नीचे खड़ा ठंडी हवा का मजा ले रहा था। अल्बर्ट हॉल की शाम में असल बात इमारत नहीं, उसके चारों तरफ चलती जिंदगी होती है। और जयपुर को शाम में देखना हो, तो यहीं से पधारो।
