अलवर धरने में मंत्री खुद बैठ गए
अलवर में सफाई कर्मियों का धरना तब और चर्चा में आ गया जब वन मंत्री खुद उनके साथ बैठ गए। मामला नया नहीं है: नियुक्ति पत्रों को लेकर एक साल से ज़्यादा की देरी बताई जा रही है, और इसी वजह से कर्मियों ने अपनी बात निगम के बाहर रखी। यही वह बिंदु था जहाँ राजनीति से ज़्यादा प्रशासन का हिसाब दिखने लगा। कांग्रेस ने इस दृश्य को भाजपा सरकार की कमजोर कार्यप्रणाली से जोड़ा, जबकि मंत्री ने भी व्यवस्था की देरी पर उंगली उठाई। अलवर जैसे शहर में सफाई का काम रोज़ का है, इसलिए कागज़ी अटकी हुई गाड़ी लोगों को और खटकती है। एक तरफ मैदान पर धरना, दूसरी तरफ कुर्सी पर जवाब — और बीच में वही सवाल: पत्र कब मिलेंगे?
