अमेर किले की हाथी सवारी पर फिर सवाल
विश्व हाथी दिवस पर जयपुर का अमेर किला एक बार फिर उसी पुराने सवाल के बीच आ गया — विरासत पर्यटन का रंग, और हाथी के स्वास्थ्य का बोझ। एक संगठन ने राजस्थान सरकार को लिखकर कहा है कि हाथी सवारियों को चरणबद्ध तरीके से, लेकिन स्थायी रूप से समाप्त किया जाए। उनका कहना है कि जंगल में रहने वाले हाथी को कैद में सवारी बनाना उचित नहीं, और इससे शारीरिक के साथ मानसिक तनाव भी होता है। इस अपील के साथ 75 से अधिक लोगों ने भी अपनी राय रखी, और कहा कि राजस्थान की पहचान केवल सवारी से नहीं, बल्कि उसकी इमारत, कला और कहानियों से भी बनती है। बात सीधी है: अमेर किले को देखने का तरीका बदल सकता है, पर उसकी शान कम नहीं होगी। जयपुर की यह चर्चा अब एक नई दिशा मांग रही है — घणी विरासत, पर बिना किसी तकलीफ के।
