आज का मारवाड़ी शब्द: अनहुई
अरे, मारवाड़ी में “अनहुई” बोलते हैं जब कोई बात, काम या योजना हुई ही नहीं। यह शब्द सीधा, सरल और थोड़ा मज़ेदार है। जैसे जयपुर का दोस्त बोल दे: “कल चाय पर मिलने का योजना था, पर वह तो अनहुई रह गया।” इसका आकर्षण यही है — इसमें बहुत बड़ा नाटक नहीं, बस सच्ची बात है। रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे बहुत से योजनाएँ होती हैं: फोन करना था, जाना था, करना था… और फिर अनहुई। मारवाड़ी शब्द ऐसे ही अपनी जगह बना लेते हैं, एक वाक्य में पूरा मिज़ाज पकड़ लेते हैं। इसलिए “अनहुई” याद रखो: जो हुआ ही नहीं, वह भी, भाई, बोलने लायक होता है।
