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मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

अणजाण: जाने बिना भी अपनापन

Anjanyau: jaane bina bhi apnapan

घर, बाज़ार या स्कूल के गेट पर कभी कोई ऐसा मिलता है जिसका नाम, गाँव या कहानी कुछ पता नहीं होती। मारवाड़ी में उसके लिए सुंदर सा शब्द है: अणजाण, यानी अनजान या unknown। यह शब्द सीधा है, पर इसमें एक हल्की सी नरमी भी है — जैसे किसी को पहली बार देखकर भी उससे दूर न करना। जयपुर के मोहल्ला-स्तर की बोलचाल में ऐसे शब्द बात को घणी अपनी बना देते हैं। मान लो नई कक्षा में कोई बच्चा चुप बैठा है: “वो अभी अणजाण है, पर कल तक पक्का सेट हो जाएगा।” बस इतना ही। सरल, सीधा, और काम का। मारवाड़ी की यही बात प्यारी लगती है — कम शब्दों में पूरा मिज़ाज। समझे?