अर: मारवाड़ी का सबसे काम का शब्द
अर मारवाड़ी का वह शब्द है जो बात को जोड़ता भी है, और प्रवाह भी देता है। मतलब सीधा: “और”। जयपुर से जोधपुर तक, घर की बात हो या बाज़ार की, अर बोलते ही वाक्य अपना लगने लगता है। उपयोग देखो: “म्हारे घर रोटी अर छाछ दोनों मिल गए।” इसमें अर ने दो चीज़ों को साथ बाँध दिया। मारवाड़ी में ऐसे छोटे शब्द ही असली रंग लाते हैं, घणी। एक ही शब्द से बोलचाल थोड़ी ज़्यादा अपनी, थोड़ी ज़्यादा मिट्टी वाली लगती है। बस याद रखो: अर = और। इतना सा शब्द, पर काम पूरा।
