अरड़ाणो: गाय-भैंस की वह पुकार
अरड़ाणो मारवाड़ी का वह प्यारा शब्द है जो गाय या भैंस की पुकार के लिए बोला जाता है। गाँव में जब छोटे बच्चे खुले आँगन में खड़े होकर ऐसी आवाज़ निकालते हैं, तो बड़े हँसकर कहते हैं, “अरड़ाणो मत कर, पशु घबरा जाएगा।” इसमें बस आवाज़ नहीं, पहचान भी होती है—किस घर की गाय है, किस मोहल्ले की भैंस है, सब समझ आ जाता है। म्हारे यहाँ यह शब्द रोज़ के जीवन से जुड़ा है: सुबह चारा, शाम को वापसी, और आँगन में गूँजती वह पुकार। अरड़ाणो, सच्ची, गाँव की ज़ुबान का सीधा और जीता-जागता हिस्सा है।
