बागर: बाजरे का घरेलू स्टॉक
बागर (बागर) मारवाड़ी का वह सीधा-सा वर्ड है जो गाँव की जिम्मेदारी भी दिखाता है। इसका मतलब है बाजरे की पूला-गठरियों को इस तरह जमाकर रखना कि वो फ्यूचर में काम आ सकें। खेत से आई फसल बस बिखरी नहीं रहती; उसे सहेजकर, सुखाकर, और ठीक जगह पर स्टैक किया जाता है। म्हारे राजस्थान में ऐसी बात रोज की जिंदगी का हिस्सा है, खासकर जब बारिश कम हो और अनाज संभाल के रखना पड़े। यूसेज भी सिंपल है: “बाजरा आ गया, अब बागर लगा दो।” सच्ची, एक वर्ड में काम, ढंग, और गाँव की समझ — तीनों आ जाते हैं.
