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मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

बागर: बाजरे के पूलों का काम का शब्द

Baagar: bajre ke poolon ka kaam ka word

बागर मारवाड़ी में उस सजी हुई सजावट का नाम नहीं, बल्कि बाजरे के पूलों की वह सही तरह लगी हुई गड्डी है जो बाद के काम आती है। गाँव में फसल कटने के बाद पूलों को यूँ ही नहीं छोड़ते; उन्हें धीरे-धीरे जमाकर बागर बनाते हैं, ताकि चारा, भुजा या अगले उपयोग के लिए सब संभल रहे। यह शब्द सीधा सा है, पर इसमें मेहनत और सोच दोनों भरी हैं। म्हारे यहाँ कोई कहे, “बागर ठीक बनी है,” तो समझ लो काम जम गया। पधारो, ऐसे शब्द ही बोलचाल में मिट्टी की खुशबू बचाए रखते हैं।