बांटे: राजस्थानी जमीन की बोली
खेत, पानी और हिसाब—गांव की ज़िंदगी इन तीन चीज़ों से चलती है। मारवाड़ी में बांटे का मतलब होता है लीज़, यानी किसी और की जमीन को बताई पर लेना। ये लफ़्ज़ तब सुनने को मिलता है जब किसान अपनी मेहनत से दूसरे की जमीन जोते, बीज डाले और फसल का हिसाब पहले से पक्का हो। जयपुर साइड के गांव में कोई बोले, “म्हारे खेत बांटे पर लिए,” तो मतलब सीधा है: जमीन अपनी नहीं, पर काम अपना। इसी में मारवाड़ी की सीधी बात छुपी है — कम लफ़्ज़, साफ़ मतलब। बांटे सुनके लगता है जैसे गांव का पूरा हिसाब एक ही शब्द में बांध दिया हो.
