बांटे: ज़मीन की वह बात जो घर जोड़ती है
बांटे, यानी ज़मीन का पट्टा या बटाई, गाँव की रोज़ की बात है। जब किसान अपनी ज़मीन किसी और को खेती के लिए देता है और बदले में हिस्से या तय रकम पर समझौता होता है, तो उसे बांटे कहते हैं। यह शब्द सिर्फ काम का नहीं, गाँव के रिश्ते समझाने वाला भी है। म्हारे यहाँ ऐसे शब्द सीधे और सच्चे होते हैं — बिना बड़ा बनाए बात बोल देते हैं। अगर कोई बोले, "इस बार खेत बांटे पर दिया है," तो समझ लो ज़मीन अब किसी और के हाथ में उपज रही है। घणी सीधी बात, पर गाँव की ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा। और हाँ, बांटे वाली बात सुनते ही हिसाब भी उतना ही सीधा रखा जाता है।
