Jaipur Live
← Feed
मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

बाँठ: जब बोझा भी अपना-सा लगे

Baanth: jab bojha bhi apna sa lage

बाँठ एक सीधा-सा मारवाड़ी शब्द है, पर इसका रंग बहुत अपना लगता है। इसका मतलब होता है बोझ, वह भार जो इंसान उठाए हुए चले। घर में कपड़े का बाँठ हो, खेती का बाँठ हो, या दिमाग का बाँठ हो — सब के लिए बोला जा सकता है। जयपुर के आसपास ऐसे शब्द रोज़ की बात में घुल जाते हैं, इसलिए सुनते ही समझ आ जाता है। प्रयोग भी आसान है: “आज म्हारे सिर पर घणो बाँठ है।” यानी आज काम ज़्यादा है, या ज़िम्मेदारी भारी है। यह शब्द बोली में एकदम सच्चा लगता है — बिना फिल्मी नाटक के। मारवाड़ी में ऐसे शब्द बस अर्थ नहीं देते, माहौल भी दे देते हैं।