बारै: बाहर का मारवाड़ी शब्द
बारै (बारै) मारवाड़ी का वह छोटा-सा शब्द है जो सीधे दिल में लग जाता है: मतलब, बाहर। घर के आँगन से लेकर गली के मोड़ तक, जब कोई चीज़ घर के अंदर नहीं, बारै होती है। जयपुर की गर्म दोपहर हो या शाम की ठंडी हवा, यह शब्द हर दृश्य में फिट बैठता है। प्रयोग भी बढ़िया है: “चलो, बारै आ जाओ।” यानी, बाहर निकल आओ। या फिर: “जूता बारै पड़ा है।” मतलब जो चीज़ घर के अंदर नहीं, वह बारै। मारवाड़ी में ऐसे शब्द बोलने से बात में अपनापन आ जाता है। घणी सीधी, घणी काम की बात — और कसम से याद भी जल्दी रहती है।
