बारै: घर से बाहर का मारवाड़ी शब्द
बारै (बारै) मारवाड़ी का वह शब्द है जो सीधा सा है, पर काम का घणो है। इसका मतलब होता है बाहर। घर के आँगन में खड़े होकर कोई बोले, “म्हारो छोरो बारै खेल रयो है,” तो बात तुरंत समझ में आ जाती है। जयपुर की गरम दोपहर हो या गाँव की गली, बारै सुनते ही मन में थोड़ी खुली हवा आ जाती है। मारवाड़ी में ऐसे शब्द रोज की बात को अपना रंग दे देते हैं। इसका मजा भी यही है—सरल, सीधा, और बोलते ही मुँह पर सुथरी सी मुस्कान। अगली बार कोई पूछे, “कहाँ है?” तो बस बोलो: “बारै।”
