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मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

बच्योड़ा: जो थोड़ा सा रह गया

Bachyoda: jo thoda sa reh gaya

बच्योड़ा मारवाड़ी का वह सीधा-सादा शब्द है जो घर की रोज़ की बात में घुल जाता है। जब सब कुछ बाँट दिया हो और थोड़ा-सा हिस्सा रह जाए, उसे बोलते हैं बच्योड़ा — यानी बचा हुआ, शेष। जयपुर में कभी सब्ज़ी तौलते समय, कभी मिठाई बाँटते समय यह शब्द काम आ जाता है। इसका आकर्षण इसी में है कि यह सीधा, प्यारा और बिलकुल घर-जैसा लगता है। प्रयोग देखो: “म्हारे लिए एक कटोरी बच्योड़ी चाय रख दे।” मतलब बस थोड़ी-सी चाय बची हो तो मेरे लिए सँभाल कर रख देना। घणी सच्ची बात है न? ऐसे शब्द बोलचाल में मारवाड़ की महक ले आते हैं।