बधणों: आज का मारवाड़ी शब्द
आज का मारवाड़ी-मुक्ति शब्द है बधणों — मतलब, बढ़ना या grow करना। यह शब्द घर, काम, और ज़िंदगी, तीनों में ठीक बैठता है। जैसे कोई बोल दे, 'म्हारो छोरो रोज बधणो है,' तो साफ़ समझ आता है कि वह आगे निकल रहा है। राजस्थान की बोली में ऐसे शब्द सीधे, पर घणे काम के होते हैं। इस शब्द का मज़ा तब आता है जब आप छोटी सी बात में उन्नति कहना चाहो। स्कूल में अंक बढ़ना हो, दुकान में भीड़ बढ़ना हो, या पौधे का बढ़ना हो — बधणों सब पर ठीक बैठता है। बस याद रखो: यह बोलचाल जैसा भी लगे, पर इसका मतलब बिलकुल साफ़ है। आज का शब्द अपनी बात में घुसा दो, भाई, और बोली थोड़ी और अपनी लगने लगेगी।
