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मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

बाजरो: धरती का सच्चा साथी

Bajro: dharti ka sacha saathi

बाजरो, यानी बाजरो, मारवाड़ और ठंडे-उखड़ते मौसम का पुराना साथी है। यह रेगिस्तानी अनाज है, इसलिए कम पानी में भी टिक जाता है और गाँव की रोटी को मज़बूती देता है। घर में जब बाजरे की रोटी, लहसुन की चटनी और मक्खन आता है, तो बात सीधे पेट से दिल तक पहुँचती है। मारवाड़ी में इसे प्यार से रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अनाज भी समझा जाता है। इसका प्रयोग बिलकुल सरल है: “आज म्हारे घर बाजरो पको।” मतलब, आज घर में बाजरे का खाना बना। घणी सच्ची बात है — कुछ शब्द खाने जैसे होते हैं, याद रह जाते हैं।