बाजरो: घर-घर का सच्चा अनाज
बाजरो रेगिस्तान का वह अनाज है जो कम पानी में भी खड़ा रहता है और घर की थाली को भर देता है। मारवाड़, शेखावाटी और गाँव के कई घरों में इसकी रोटी, राब और खिचड़ी आज भी रोज का हिस्सा है। स्वाद थोड़ा मिट्टी-सा, पर पेट और मन दोनों को सुकून। मारवाड़ी में एक सीधी बात है: “बाजरो खायो, ताकत आयो।” इसका मतलब है, बाजरे की रोटी खाओ और शरीर में दम आए। गाँव की छत की दीवार के नीचे जब बाजरे की रोटी और घी रखा जाता है, तब वही घर का असल रंग दिखता है। सच्ची, यह शब्द सिर्फ अनाज नहीं, राजस्थान की मेहनत का छोटा सा नाम है।
