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मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

बाळी: प्यार से कही जाने वाली बात

Balyee: pyaar se kahi jaane wali baat

बाळी मारवाड़ी का वह शब्द है जो डाँटता कम, प्यार ज़्यादा करता है। जब कोई अपनी सहेली, बहन या घर की छोटी-सी शरारती औरत को हल्का-सा छेड़ते हुए बुलाए, तब ‘बाळी’ बोलते हैं। इसमें बेइज़्ज़ती नहीं, अपनापन होता है — बिल्कुल जैसे जयपुर की गली में कोई हँसते-हँसते कह दे, “अरे बाळी, फिर से चाय ठंडी कर दी क्या?” यह शब्द घर के आँगन, मोहल्ले और नानी-नानी की बातों में ज़िंदा रहता है। इसका मिज़ाज नरम है, और इसलिए इसे ज़ोर से नहीं, मुस्कान के साथ बोलते हैं। इस्तेमाल कैसे करें? “बाळी, एक मिनट रुक जा।” बस, इतना सा। घणी प्यारी बात, घणी काम की।