बाळ्यो: प्यार वाला सिली बंदा
बाळ्यो सुनते ही मूड हल्का हो जाता है। मारवाड़ी में यह उस बंदे के लिए बोला जाता है जो थोड़ा भोला, थोड़ा उल्टा-सीधा, पर बिलकुल अपना लगता है। इसमें डाँट कम, प्यार ज़्यादा होता है। गाली जैसा सुनाई दे, पर नीयत बिलकुल नरम। जयपुर की गलियों में ऐसे बोल सुनने को मिल जाते हैं जब कोई दोस्त चाय के साथ बिस्कुट को ही खाना भूल जाए, या साइकिल को घर के अंदर घुसा दे। तब कोई बोल देता है, “अरे बाळ्यो!” और सब हँस पड़ते हैं। प्रयोग आसान है: “म्हारा भाई, तू तो घणो बाळ्यो निकल्यो।” बस याद रखो — अनजान पर मत बोलना, वरना मज़ाक से बात बिगड़ भी सकती है।
