बापू बाजार की पहली खरीदारी
बापू बाजार में सुबह से ही कपड़े, दुपट्टे और जूतियों की चमक आ जाती है। एक तरफ बंधेज और लहरिया के रंग, दूसरी तरफ मोजड़ियों की खुशबू और चमड़े की नरम खड़खड़ाहट। पर्यटक यहीं पहली बार रुकता है, क्योंकि यह बाजार जयपुर की एक सीधी सी पहचान है: पहनावा और पैरों की सजावट, दोनों एक साथ। दुकानदार पहले एक दाम बोलता है, फिर मुस्कान देख कर बात नीचे आती है। घणी बार यही पहला सबक होता है—सच्ची खरीदारी सिर्फ पैसा नहीं, नज़र भी माँगती है। एक जूती हाथ में लो, तो काम की सिलाई, तला और रंग का फर्क तुरंत समझ आ जाता है। बापू बाजार का मज़ा यही है: यहाँ हर चीज़ बिकती है, पर असली जीत उसकी होती है जो देख कर चुनता है।
