बाड़मेर का ब्लाइंड मर्डर केस पलट गया
बाड़मेर के इस मामले में पहले तो सबको बस एक खामोश सा सीन दिखा — कोई सीधा रास्ता नहीं, कोई साफ जवाब नहीं। पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन को टुकड़ों में जोड़ा, और वही टुकड़े आखिर एक पैटर्न बन गए। सदर पुलिस ने जो एक्शन लिया, उससे यह क्लियर हुआ कि ब्लाइंड मर्डर का मतलब हमेशा अंधेरा नहीं होता; कभी-कभी छोटी सी डिटेल ही पूरी कहानी खोल देती है। लोकल लोग भी यही कह रहे थे — गांव या मोहल्ला हो, ऐसे केसेस में अफवाह जल्दी चलती है, पर सच धीरे निकलता है। पुलिस की पकड़ से केस का रुख बदला, और अब पूरा फोकस उस चेन पर है जो घर के अंदर से शुरू हुई थी। कसम से, यही वह बात है जो इस मामले को और भारी बना देती है: जब रिश्ते ही केस का सेंटर बन जाएं, तो सन्नाटा और गहरा लगता है.
