बाड़मेर रिफाइनरी की देरी पर फिर सवाल उठा
बाड़मेर की रिफाइनरी सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि पश्चिम राजस्थान के लिए रोज़गार, काम और नई चाल की उम्मीद भी थी। इसी लिए जब इसकी पूर्णता में लगभग 5 साल की देरी पर फिर बात उठी, तो गाँव से शहर तक एक ही सवाल घूम गया — इतना बड़ा काम इतना धीरे क्यों? PM Modi की Rajasthan visit से पहले यह मुद्दा और तेज हो गया, क्योंकि जनता को अब केवल घोषणा नहीं, परिणाम चाहिए। बाड़मेर और पचपदरा इलाके के लोगों के लिए रिफाइनरी का मतलब सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि स्थानीय दुकान, परिवहन, किराया और नौकरी का चक्र भी है। सच्ची बात यह है कि बड़े प्रोजेक्ट का इंतज़ार भी अपनी एक अलग थकान ले आता है। इसी थकान के बीच, 5 साल की देरी सबसे भारी लग रही है।
