ब्लू पॉटरी: जयपुर की नीली कहानी
ब्लू पॉटरी जयपुर की पहचान है, पर इसकी जड़ें मध्य एशिया और फ़ारस तक जाती हैं। नीले रंग की साफ़ चमक, फूल-पत्ते, पक्षी और जानवरों के चित्र इसे अलग पहचान देते हैं। खास बात यह है कि इसमें मिट्टी नहीं होती: क्वार्ट्ज पत्थर का चूर्ण, काँच का चूर्ण, मुल्तानी मिट्टी, बोरेक्स, गोंद और पानी से घोल तैयार होता है। यह सामान कम आँच पर एक बार पकता है, इसलिए इस पर दरार कम पड़ती है। जयपुर के कारीगर इस पुरानी कला को आज भी नए डिज़ाइन के साथ सँभाल रहे हैं। पधारो, इस नीले रंग में सिर्फ रंग नहीं, एक शहर की याद भी बसी है।
