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आज की जयपुरAaj Ki Jaipur

ब्रह्मपुरी की नीली गलियों का सुबह का चक्कर

Brahmpuri ki neeli galiyon ka subah ka chakkar

ब्रह्मपुरी की नीली गलियों में सुबह धूप सीधी नहीं गिरती, थोड़ी मुड़कर आती है। छतों के नीचे से सब्जी वाले की आवाज़, पानी की बाल्टी की खनखन, और साइकिल की घंटी मिलकर पुरानी जयपुर की एक अलग ही चाल बना देते हैं। यहाँ घर से निकलना भी एक छोटा सा काम है—किस गली से जाना, किस मोड़ पर बचना, और किस पड़ोसी के दरवाज़े पर दो पल रुकना। इसी चक्कर में एक मोची की दुकान के बाहर वह साइकिल हर रोज़ 17 मिनट देर से आती है। सब लोग उसे देखकर समझ जाते हैं कि आज का दिन भी अपनी ही रफ़्तार से चलेगा। ब्रह्मपुरी की सुबह का सुख भी यही है: घणी सादगी, और हर मोड़ पर एक पहचानी हुई वजह।