ब्रह्मपुरी की नीली गलियों में जयपुर का सांस
ब्रह्मपुरी की नीली गलियों में चलने का मज़ा अलग है। दीवारों पर लगा नीला रंग सिर्फ सुंदर नहीं, गर्मी में ठंडक का एहसास भी देता है। सुबह कोई कपड़े सुखा रहा होता है, कोई आटा गूँध रहा होता है, और बच्चे तंग गली में गेंद उछालते रहते हैं। यह जगह पर्यटन स्थल से ज़्यादा जीती-जागती लगती है, क्योंकि यहाँ हर दीवार के साथ कोई न कोई रोज़मर्रा की बात जुड़ी है। एक कोने पर बैठी बुजुर्ग महिला ने बताया कि नीला रंग उनके लिए बस रंग नहीं, पहचान है। घणी सच्ची बात है — ब्रह्मपुरी में सुंदरता सजाने से कम, जीने से ज़्यादा आती है। छत की छाया, पानी का मटका, और पड़ोस की आवाज़; बस इतना ही जयपुर का असली रंग है।
