कावेरी पर सर्वदलीय बैठक से इनकार, संदेश साफ
कावेरी पानी के मुद्दे पर तमिलनाडु की राजनीति में फिर से तनाव दिखा, लेकिन इस बार बात बैठक से ज़्यादा संदेश की थी। सर्वदलीय बैठक को अस्वीकार करते हुए यह कहा गया कि विधानसभा पहले ही एकजुट होकर प्रस्ताव पास कर चुकी है, इसलिए नई बैठक की ज़रूरत नहीं बची। यह बात सीधी थी, पर इसके पीछे एक साफ़ राजनीतिक हिसाब था। विपक्ष पर राज्य के हितों के खिलाफ चलने का आरोप भी लगाया गया, और कर्नाटक के मुख्यमंत्री के साथ समझ-बूझ को लेकर भी सवाल उठे। बेंगलुरु को विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए वित्तीय आधार बताने वाली बात ने इस मुद्दे को और तेज़ कर दिया। मतलब, पानी का झगड़ा सिर्फ नदी तक सीमित नहीं, अब भरोसे और राजनीति की नलियों तक पहुँच गया है। घणी बड़ी बात है, समझे?
