चेन्नई मेट्रो की ड्राइवरलेस सवारी ने ध्यान खींचा
चेन्नई मेट्रो फेज़-II की प्रगति देखते हुए एक ड्राइवरलेस ट्रेन की सवारी ने पूरे दृश्य को अलग रंग दे दिया। नीचे प्लेटफ़ॉर्म की साफ़-सुथरी रेखा, ऊपर धातु और काँच का आधुनिक ढाँचा, और बीच में बिना चालक के चलती ट्रेन — बस यही देखकर लगता है कि शहर का सफ़र कैसे बदल रहा है। यहाँ बात सिर्फ़ निर्माण की नहीं, बल्कि उस भरोसे की भी है जो लोग नई परिवहन व्यवस्था पर करते हैं। ट्रेन की सहज गति और नियंत्रित रफ़्तार ने यह एहसास दिया कि तकनीक अब रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनने को तैयार है। एक छोटी-सी टिप्पणी भी यही थी कि जब सार्वजनिक परिवहन इतना सुगम हो, तो शहर की धड़कन भी हल्की और तेज़, दोनों हो जाती है। फेज़-II की यह प्रगति, और उसके साथ ड्राइवरलेस सवारी का अनुभव, भविष्य को थोड़ा और पास ले आता है।
