चित्तौड़ की रानी पद्मिनी: एक कथा, एक अग्नि
चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का नाम सुनते ही क़िला, झिलमिल पानी और साहस का एक गहरा किस्सा याद आता है। कथा के अनुसार उनकी सुंदरता की चर्चा दूर तक पहुँची, और दिल्ली से अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ की तरफ़ बढ़ा। यहीं दर्पण वाली बात आती है, जहाँ पद्मिनी का चेहरा सीधे दिखाया गया, पर असली खेल दृष्टि और इरादे का था। चित्तौड़ के लोगों के लिए वह सिर्फ़ रानी नहीं, स्वाभिमान की निशानी बनीं। मारवाड़ की बोली में कहें तो, घणी कठिन घड़ी में भी उनकी याद ने हिम्मत दी। आज भी उनकी कथा हमें बताती है: कभी-कभी एक नाम ही पूरे क़िले की पहचान बन जाता है।
