चोखी ढाणी: गाँव का स्वाद, जयपुर के पास
चोखी ढाणी जयपुर के पास वह जगह है जहाँ शहर का शोर धीरे से गाँव की चाल पकड़ लेता है। कच्ची मिट्टी के आँगन, रंग-बिरंगे मंडाने, चूल्हे की खुशबू और लोक गीतों की हल्की गूँज—सब मिलकर एक छोटा सा राजस्थान बना देते हैं। यहाँ थाली में बाजरे की रोटी, गट्टे की सब्ज़ी, केर-सांगरी और छाछ आती है, और म्हारे जैसे लोग बस एक-एक कौर में रुक जाते हैं। शाम को नाच, कठपुतली और ऊँट की सवारी का मज़ा अलग ही है। पर जो बात सबसे याद रहती है, वह 12वीं परोस की थाली है—इतनी सारी चीज़ें कि खाना भी एक सफ़र लगने लगता है। घणी सच्ची, पधारो तो एक बार।
