चोरी की शिकायत और फिर हत्या — सवाल अब भी वही
जयपुर के इस मामले ने एक बार फिर दिखाया कि छोटी लगने वाली शिकायत कभी-कभी बड़े दुख का पहला संकेत होती है। परिवार का कहना है कि घर में चोरी और कब्ज़े की कोशिश को लेकर पहले ही आवेदन दिया गया था, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से अब लोग पूछ रहे हैं कि क्या चेतावनी को गंभीरता से लिया गया होता, तो कहानी कुछ और होती। परिवार ने एक और बात उठाई है — विजय शर्मा की मृत्यु को भी संदिग्ध बताया जा रहा है, इसलिए पूरे मामले की एक ही जगह से, बिना किसी दबाव के, जाँच होनी चाहिए। CID-CB से निष्पक्ष जाँच की माँग इसी कारण ज़ोर पकड़ रही है। ऐसे मामले सिर्फ एक घर की कहानी नहीं होते; वे पूरी व्यवस्था पर सवाल छोड़ जाते हैं। और सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है: समय पर सुन लिया होता, तो क्या जान बच सकती थी?
