चोरी की शिकायत और फिर हत्या: सवाल अब भी वही
जयपुर के इस मामले में पहली चोट घर की दीवार पर नहीं, शिकायत पर लगी थी। परिवार का कहना है कि चोरी और कब्जे की कोशिश को लेकर पहले ही रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन उसके बाद भी जो होना चाहिए था, वह समय पर नहीं हुआ। इसी देरी के बीच हालात और बिगड़ते गए। अब परिवार इसी बात पर टिका है कि यदि पहली सुनवाई ही सही होती, तो जान बच सकती थी। एक और पहलू विजय की मौत को लेकर भी उठाया जा रहा है, जिसे लोग शांत नज़र से देखने को तैयार नहीं। म्हारे शहर में ऐसे मामले बस एक घंटा नहीं, पूरा भरोसा हिला देते हैं। इसी लिए अब CID-CB से निष्पक्ष जाँच की माँग ज़ोर पकड़ रही है।
