सहकारी और सीमा क्षेत्र पर मुख्यमंत्री की शाह से बात
जयपुर में हुई इस मुलाकात में सहकारी क्षेत्र और सीमा क्षेत्र विकास, दोनों को एक साथ देखा गया। ये वे दो मुद्दे हैं जो कागज़ पर अलग लगते हैं, पर ज़मीन पर सीधे किसान, मंडी, परिवहन और सीमा पर रहने वाले लोगों की रोज़ की ज़िंदगी से जुड़े हैं। सहकारिता की बात आए तो सहकारी भावना की ज़मीन याद आती है, जहाँ छोटे काम भी मिल-जुलकर बड़ी राह बना देते हैं। सीमा क्षेत्र के लिए भी यही सोच काम आती है। वहाँ सिर्फ सड़क या भवन की बात नहीं होती, बल्कि पहुँच, सेवा और भरोसे की बात होती है। बैठक के बाद जो संकेत मिला, वह यही था कि ध्यान सिर्फ सुर्ख़ी पर नहीं, बल्कि ऐसे कामों पर है जो दूर के इलाके को भी व्यवस्था के करीब लाएँ। सच्ची बात यह है, जयपुर से निकली हर नीति की परछाईं सीमा तक पहुँचती है। बस अब देखना है कि इस बात का असर कितनी जल्दी दिखता है।
