अपराध पर जीरो-टॉलरेंस, अफसरों पर जिम्मेदारी
जयपुर में आज जो संदेश गया, वह सीधा और सख्त था। अपराध के मामलों में अब ढील की कोई जगह नहीं, और ज़मीनी कार्रवाई का हिसाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से लिया जाएगा। रेंज आईजी और एसपी जैसे पदों के लिए यह सिर्फ प्रशासनिक बात नहीं, बल्कि रोज़ के काम की कसौटी है। इसका मतलब साफ है: अगर किसी इलाके में कानून-व्यवस्था बिगड़ती है, तो ऊपर तक जवाब जाएगा। जयपुर, जोधपुर, कोटा जैसे बड़े शहरों में लोग अक्सर यही देखते हैं कि फ़ाइल और मैदान के बीच फासला कितना है। अब सरकारी संदेश है — निगरानी कड़ी, प्रतिक्रिया तेज़, और लापरवाही पर नज़र। म्हारे शहर की भाषा में कहें तो, बात अब सीधी है: काम दिखेगा तो भरोसा बढ़ेगा। और जो जवाबदेही का नया पैमाना आया है, वह पुलिस व्यवस्था को थोड़ा और सतर्क रखने वाला है।
